JAHNAVI SANSKRIT E-JOURNAL ISSN 0976-8645---श्रुत्युपनिषदां विमल-विचारसारेण अशेषभुवस्तले मुक्तिपथं प्रकाशयन्ती साक्षात्कृतधर्मणां सिद्धवाचां महर्षीणां चिन्तन-मननं निदधती मानवीयजीवनमूल्यानि समुदारचेतसा सर्वेभ्यः सस्नेहं प्रयच्छन्ती अनवद्याभिर्विविधकलाभिः समेषां मनोविनोदयन्तीधियञ्च पुष्णन्ती देवी वागीयं देशविदेशे च प्रीतिसम्मानभाजनं विद्यतेतरामिति नाविदितं विदुषाम्। इयमस्ति भारतीयसंस्कृतिसभ्यतयोरुत्सः, सदाचारविचाराणां शेवधिः विविधशास्त्राणां रत्नाकरः इति न प्रयत्नप्रतिपादनीयम्। प्रागैतिहासकालादारभ्य अधुनावधि विश्वविपश्चितां मानसकमलमध्यास्य वीणां निनादयन्ती ज्ञानालोकं प्रसारयन्ती प्रतिकूलवाताहतापि सुरगवीयं दिव्यज्ञानामृतं प्रदाय हर्षवर्षं निरन्तरं कुरुतेतराम्। “संस्कृतेश्चत्वारोऽधयाया” इति राष्ट्रभाषानिबद्धे बैदुष्यपूर्णे ग्रन्थे राष्ट्रकविर्दिनकरः भाषामेतामादाय स्वविचारं प्रकाशयन् आह- भारतस्य यत् किमपि मौलिकं चिन्तनं सत्यं शिवं सुन्दरं च तत्त्वमस्ति तत् सर्वं प्राक् संस्कृतभाषायामेवाभिव्यक्तिमगात्। तदनूदितमेव सर्वं तदितरभारतीयभाषासु दृष्टिपथमायाति। वस्तुतोऽत्रैव भारतीयतायाः परिचयः अन्वेष्टुं शक्यते। साम्प्रतं विज्ञानप्रभावात् समस्ते जगति कुटुम्बायमाने संवृत्ते अस्या महीयस्या गिरः प्रचारः प्रसारश्च सुकरो विद्यते। समस्तं जगदधुना अशान्तमिव क्षुब्धमिव हिंसाद्वेषदग्धमिव दृश्यते। विषमसमयेऽस्मिन् देवगिरोऽस्याः प्रीति-मैत्री-रस-प्रसादः समेषामपेक्षितो वर्तते। कदाचिदस्याः सुधामयोपदेशेन विश्वजनमानसं शान्तिमानन्दं च लभतामित्युद्दिश्य आन्तर्जालमाध्यमेन सर्वत्रास्याः प्रचाराय प्रसाराय च संस्कृतवाङ्मयसारगर्भा जाह्नवीव जनमानस्तापहारिणी जाह्नवी नाम मासिकी पत्रिका प्रकाश्यमाना अस्ति। तत्र प्रकाशनाय संस्कृते राष्ट्रभाषायाम् आंग्लभाषायां वा आलेखान् प्रेषयितुं श्रीमन्तो विद्वांसः सादरमामन्त्रिता भवन्ति। सारस्वतेऽस्मिन् यज्ञे संस्कृतानुरागिणः संस्कृतमर्मविदश्च विद्वांसः सहर्षं सहयोगं प्रदाय पुण्यभाजो यशोभाजश्च भविष्यन्ति इत्येवमाशास्ते। वसन्ताङकात् प्रकाश्यमानीतेयं जाह्नवी सुचिरं सर्वत्र प्रवहन्ती सहृदयजनमानसे शान्तिं सुखं सन्तोषञ्च प्रयच्छतात्। 

JAHNAVI SANSKRIT E-JOURNAL
 SARASVAT-NIKETANAM 
LAST UPDATE- 10/02/2018 09:41 AM
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  • JAHNAVI SANSKRIT E-JOURNAL : A UGC approved Journal with ISSN (0976-8645) and Impact Factor. INAUGRATION- प्रो हरेकृष्ण शतपथी, कुलपति, रा.सं. विद्यापीठ, तिरुपति , , डॉ. के. पी. उपाध्याय, कुलसचिव एवं परीक्षानियंता, काशीहिन्दूविश्वविद्यालय , , डॉ. रामजी, साहित्य अकादमी सम्मानित, प्राचार्यचर, सरिसवपाही, मधुबनी , , प्रो. दीनबन्धु चन्दौरा, अमरीका के अटलाण्टा नगर में प्रथित शिक्षाविद , , डा. बी.के महापात्र, श्री लालबहादुर राष्ट्रिय संस्कृत विद्यापीठ के कुलसचिव , , स्वामी निखिलात्मानन्दजी महाराज, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, इलाहावाद के अध्यक्ष , , प्रो. श्रुतिधारी सिंह , प्रथित शिक्षाविद् एवं आचार्य, रामकृष्ण महाविद्यालय, मधुबनी , , प्रो. शंकरजी झा, पञ्जाब विश्वविद्यालय के संस्कृतविभागाध्यक्ष , , प्रो. राधावल्लभत्रिपाठी, कुलपति, राष्ट्रियसंस्कृतसंस्थान (मानितविश्वविद्यालय), नई दिल्ली , , प्रो. रामानुज देवनाथन्, कुलपति, जगद्गुरुरामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर , , प्रो. ओम्प्रकाश पाण्डेय, संस्कृतविभागाध्यक्षचर, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ , , परमपूज्य श्री श्री सुगुणेन्द्रतीर्थस्वामी, मठाधीश, पुत्तिगे मठ, उडुपि, कर्णाटक , , Shri Indu Shekhar Jha, Rtd. SP, Bhagalpur , , Smt. K P Prasanna, Principal, GSC, Tripinithura, Kerala , , आचार्य अभिराजराजेन्द्रमिश्र, कुलपतिचर, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी , , स्वामीनीलकण्ठानन्द जी महारज, अध्यक्ष, रामकृष्णमठ,शिमला, हिमाचलप्रदेश , , प्रो.रमाकान्तपाण्डेय, निदेशक, मुक्त स्वाध्यायपीठम्, राष्ट्रियसंस्कृतसंस्थान (मानितविश्वविद्यालय), नई दिल्ली , , प्रो.डा. रामकृष्ण पिशिपाटि महोदय, काञ्चीपुरस्थ श्रीचन्द्रशेखरेन्द्रसरस्वती विश्वमहाविद्यालय, तमिलनाडू , , आचार्य ललित कुमार गौड, संस्कृत-प्राच्यविद्यासंस्थानस्य निदेशक , कुरुक्षेत्रविश्वविद्यालय हरियाणा , , श्रीप्रतापसिंहजी , पूर्वमन्री -UDH, राजस्थान सरकार, जयपुर)


    ARCHIEVES ( पुरातनाङ्कविवरण|)



    ISSUE 01.
  • Issue-1st || Vol-I || Date-20.1.2010 || Year- 1 || Place-Rashtriya Sanskrit Sansthan, Tirupati, India.
  • Inaugurated by- Prof. Harekrishn Satapathi (V.C)
  • Representative- Dr. Pradeep Jha, Dr. Ramsevak Jha
  • Report-भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई के शोधछात्र बिपिन कुमार झा के निरन्तर अथक प्रयास से अस्तित्वप्राप्त प्रथम आनलाइन शोधपत्रिका (Sanskrit E-Journal) जाह्नवी का लोकार्पण ज्ञानाधिष्टात्री देवी सरस्वती के पूजनोत्सव (२० जनवरी २०१०) के अवसर पर राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान, तिरुपति के कुलपति ख्यातिलब्ध प्रो हरेकृष्ण शतपथी महोदय के करकमलों से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर प्रो. रविशङ्कर मेनन (संकायाध्यक्ष, शिक्षाशास्त्री), प्रो. राधाकान्त ठाकुर (ज्योतिष विभागाध्यक्ष), श्री प्रदीप झा, श्री राम सेवक झा समेत विद्यापीठ के वरिष्ठ अध्यापक, कर्मचारीगण एवं शोध छात्र उपस्थित थे। इस पत्रिका की विशेषता यह है कि यह किसी संस्था से सम्बद्ध नही है एवं संस्कृत के संवर्द्धन हेतु समर्पित है|





  • ISSUE 02.
  • Issue-2nd || Vol-I || Date-20.04.2010 || Year- 1 || Place- Varanasi, UP, India
  • Inaugurated by- Dr. K P Upadhyay, Registrar, BHU.
  • Representative-Dr. Sandeep Kumar Singh
  • Report-डॉ0 के0पी0उपाध्याय, कुलसचिव एवं परीक्षानियंता, काशीहिन्दूविश्वविद्यालय ने आज दिनॉक.20.04.2010 को संस्कृत के प्रथम आन लाइन जर्नल जाह्नवी के द्वितीय अंक (ग्रीष्मांक) का लोकार्पण किया। सभा को सम्बोधित करते हुए डॉ0 उपाध्याय ने कहा कि-बदलते हुए समाज की परिस्थितियों के साथ-साथ संस्कृत को भी परिवर्धित एवं परिवर्तित करना आवश्यक है, क्योंकि जिसप्रकार नदी गतिशील होने से जीवित रहती है उसी प्रकार भाषा में भी गतिशीलता होनी चाहिए। मैं मानता हॅू कि जाह्नवी भी इस दिशा में एक प्रयास है। सभा का संचालन करते हुए जर्नल के सम्पादकमण्डल के सदस्य संदीप कुमार सिंह ने इस विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि जाह्नवी संस्कृत भाषा में विश्व की प्रथम आन-लाइन त्रैमासिक जर्नल है, जो संस्कृतानुरागियों के लिए इण्टरनेट के माध्यम से उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराता है साथ ही शोधार्थियों को अभिव्यक्ति का एक व्यापक अवसर प्रदान करता है। इसके पूर्व संस्कृत में अनेंक जर्नल छपते रहे है किन्तु इण्टरनेट पर इस तरह का यह पहला प्रयास है। संस्कृतविद्याधर्मविज्ञानसंकाय के संकायप्रमुख प्रो0 रमेशचन्द्र पण्डा ने बताया कि इस प्रकार के जर्नल की आवश्यकता बहुत पहले से महसूस की जा रही थी, किन्तु मूर्तरूप प्रदान करने में मुख्य भूमिका आस्ट्रेलिया के प्रो0 हिमांशु पोटा, आई0आई0टी0 मुम्बई के विपिन झा (शोधछात्र), का0हि0वि0वि0 के संदीपकुमारसिंह (शोधछात्र) आयुर्वेदसंकाय, व राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरूपति के प्रदीपझा(शोधछात्र), का रहा। इसके संरक्षक मण्डल में मुख्य रूप से प्रो0 राजेन्द्र मिश्र,(पूर्व कुलपति,सं0सं0वि0वि0), डॉ0 वनमाली विश्वास (रा0सं0सं0), प्रो0 शुकदेव भोई (संकायप्रमुख,ला0ब0सं0वि0)दिल्ली, प्रो0 यू0सी0राव (पूर्व विभागाध्यक्ष,जे0एन0यू0) आदि प्रमुख हस्तियॉ शामिल हैं। इस अवसर पर प्रो0 श्रीनिवास तिवारी, प्रो0सच्चिदानन्द मिश्र, आशिषकुमार आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किया। मंगलाचरण डॉ0 अनिलकुमार मिश्र तथा धन्यवाद ज्ञापन नीरज त्रिवेदी ने किया।






  • ISSUE 03.
  • Issue-3rd || Vol-I || Date-13.08.2010 || Year- 1 || Place- Ujan, Bihar, India.
  • Inaugurated by-Prof. Ramaji Thakur, Sahitya Academy awarded.
  • Representative-All Sanskrit Scholars of Mithila.
  • Report- भारत सरकार के पूर्व शिक्षाविद सदस्य डॉ. सदानन्द झा के मुख्य सम्पादकत्व में IIT मुम्बई के शोधछात्र बिपिन कुमार झा द्वारा प्रकाशित सारस्वत निकेतनम् (Home of Sanskrit lovers) के जाह्नवी संस्कृत ई जर्नल के तृतीय अंक वर्षांक का लोकार्पण मिथिला पावनधाम में संस्कृत साहित्य के प्रख्यात विद्वान एवं अनेक ग्रन्थों के रचयिता, सरिसबपाही कालेज के पूर्वप्राचार्य डॉ. रामजी ठाकुर ने किया। डॉ. ठाकुर ने अन्तर्जाल के माध्यम से ई जर्नल को क्लिक कर तृतीयांक “वर्षांक” को जनसमर्पित किया। इस लोकार्पण कार्यक्रम में क्षेत्र की कई सम्मानित विभुतियाँ उपस्थित थी। पूर्व प्राचार्य डॉ. मिहिर ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. हरिशंकर मणि त्रिपाठी, डा० रमेश कुमार झा, डा० महाकान्त ठाकुर थे। इसके अतिरिक्त वक्ताओं में डॉ. सदानन्द झा, डा० अभयधारी सिंह, डा० सुधीर कुमार झा, बिपिन झा, डॉ. गिरिश झा आदि ने भी पत्रिका के महत्त्व पर विशद रूप से प्रकाश डाला। संचालन साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान डॉ. राघव झा ने किया। सभा के मुख्य अतिथि डॉ. केदार नाथ झा (हर्षपति सिंह महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य) थे।






  • ISSUE 04.
  • Issue-4th || Vol-I || Date-30.10.2010 || Year- 1 || Place- Atlanta
  • Inaugurated by-Dr Dinbandhu Chandaura
  • Representative-Aacharya Vedashrami
  • Report- भारत सरकार के पूर्व शिक्षाविद सदस्य डॉ. सदानन्द झा के मुख्य सम्पादकत्व एवं प्रो० अभयधारी सिंह तथा श्री त्रिलोक झा प्रभृति के सम्पादकत्व में आईआईटी मुम्बई के शोधछात्र बिपिन कुमार झा द्वारा प्रकाशित सारस्वत निकेतनम् (Home of Sanskrit lovers) के अन्तर्गत जाह्नवी संस्कृत ई जर्नल के चतुर्थ अंक हेमन्तशरदसंयुक्तांक का लोकार्पण अमरीका के अटलाण्टा नगर में जाने माने शिक्षाविद प्रो. दीनबन्धु चन्दौरा के ने किया। प्रो. चन्दौरा ने अन्तर्जाल के माध्यम से ई जर्नल www.jahnavisanskritejournal.com को क्लिक कर चतुर्थ अंक "हेमन्तशरदसंयुक्तांक ” को 30 अक्तूबर, भारतीय समयानुसार 6:40 बजे लोकार्पण किया। इस लोकार्पण कार्यक्रम में आचार्य वेदश्रमी सहित कई सम्मानित विभूतियाँ उपस्थित थी। इस मौके पर प्रो. चन्दौरा ने प्रकाशक बिपिन कुमार झा को इस प्रथम त्रैमासि्क संस्कृत ई जर्नल के सफलतापूर्वक प्रकाशन हेतु बधाई देते हुए समस्त सद्यों को उनके कार्य हेतु सराहना की है।






  • ISSUE 05.
  • Issue-5th || Vol-II || Date-08.02.2011 || Year- 2 || Place- LBS, New Delhi, India.
  • Inaugurated by-Dr. B. K Mahapatr, Registrar
  • Representative-
  • Report- जाह्नवी संस्कृत ई-जर्नल के पञ्चम अङ्क का लोकार्पण कुलपति महोदय के अस्वस्थता के कारण श्री लालबहादुर राष्ट्रिय संस्कृत विद्यापीठ के कुलसचिव डा. बी.के महापात्र महोदय के द्वारा दिनाङ्क ८ फरवरी २०११ मध्याह्न १ बजे संगणक कक्ष (विद्यापीठ) मे किया गया। इस अवसर पर मुख्यतिथि के रूप मे प्रो शशिप्रभा जैन उपस्थित थे। पत्रिका के महत्त्व पर प्रो भवेन्द्र झा, प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय, प्रो. कमला भारद्वाज आदि विद्वानों ने अपने-अपने विचार प्रकट किये। इस अवसर पर विद्यापीठ के समस्त अध्यापक एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डा. सुन्दरनारायण झा एवं अतिथियों का स्वागत श्री रामसेवक झा ने किया। समस्त कार्यक्रम श्री विनोद मिश्र (अनुभाग अधिकारी) के देख रेख में सम्पन्न हुआ ।






  • ISSUE 06.
  • Issue-6th || Vol-II || Date-01.05.2011 || Year- 2 || Place- Ramkrishn Mission Aashram, Allahabad, UP, India.
  • Inaugurated by-रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, इलाहावाद के अध्यक्ष स्वामी निखिलात्मानन्दजी महाराज
  • Representative-Shri Dhananjay Kumar Jha
  • Report- भारत सरकार के पूर्वशिक्षाविद् सदस्य डा० सदानन्द झा के प्रधान सम्पादकत्व में बिपिन कुमार झा द्वारा प्रकाशित ISSN 0976 – 8645 प्राप्त प्रथम त्रैमासिक संस्कृत विद्युत-शोधपत्रिका (www.jahnavisanskritejournal.com ) “जाह्नवी” के षष्ठ्म अंक का लोकार्पण रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, इलाहावाद के अध्यक्ष स्वामी निखिलात्मानन्दजी महाराज के करकमलों से 1 मई, 2011 (रविवार) को किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वेदपाठ, गीतापाठ एवं प्रार्थना से हुई। इसके अनन्तर बिपिन झा ने पत्रिका के औचित्य एवं वैशिष्ट्य पर संक्षेप में प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि डा० बनमाली बिस्वाल ने युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह पत्रिका संस्कृत के प्रचार प्रसार् हेतु हमें एकजुट करने मे सशक्त भूमिका निभाती है। कार्यक्रम के अन्त में स्वामी धरणीधरानन्दजी ने भगवती जाह्नवी के स्तोत्र की संगीतमय पाठ देवि सुरेश्वरि प्रस्तुत की।। इस अवसर पर आशुतोष, विकास, आकाश आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन धनंजय झा ने किया।






  • ISSUE 07.Issue-7th || Vol-II || Date-15.07.2011 || Year- 2 || Place- Madhubani, Bihar, India.
  • Inaugurated by-Prof. Shruti Dhari Singh
  • Representative-Shcolars of Mithila
  • Report-आर. के. कालेज मधुबनी के सभागार में सारस्वत-निकेतनम् के अंगभूत त्रैमासिक संस्कृत ई जर्नल का लोकार्पण राँटी ड्यौढी के प्रो. श्रुतिधारी सिंह द्वारा 15.7.2011 को किया गया। कालेज के प्रधानाचार्य डा. आर. के मण्डल के द्वारा सभा की अध्यक्षता की गयी। मुख्यवक्ता के रूप मे पं. सदानन्द झा ने पत्रिका की गुणवत्ता पर प्रकाश डालते हुये संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने पर बल दिया। डा. मित्रनाथ झा (मिथिला शोधसंस्थान, दरभंगा) द्वारा बिपिन कुमार झा के प्रयास को अभूतपूर्व मानते हुए संस्कृत साहित्य के विकास में ’जाह्नवी’ को आकर्षण का केन्द्र माना। ल.मि.वि.वि. दरभंगा के सीनेट सदस्य प्रो. नरेन्द्र नारायण सिंह “निराला” ने जाह्नवी त्रैमासिक पत्रिका निकालने के लिये बिपिन झा को धन्यवाद देते हुये कहा कि इसके प्रकाशन से संस्कृत जिज्ञासुओं को विशेष लाभ मिल रहा है। इन्हों ने पं. झा को भी धन्यवाद दिया। शिक्षक नेता प्रो. चन्द्रमोहन झा ने संचारमाध्यम के इस युग में ’जाह्नवी’ को अभूतपूर्व पत्रिका मानते हुये वैज्ञानिक क्षेत्र में भी संस्कृत भाषा की गुणवत्ता को महत्त्वपूर्ण माना। प्राचार्य डा. आर. के.मण्डल अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि संस्कृत भाषा को जनभाषा बनाने की कोशिश और ई-जर्नल निकालने की व्यवस्था कर बिपिन झा साधुवाद के पात्र हैं। तिरुपति विद्यापीठ, BHU, USA, LBS नई दिल्ली, रामकृष्ण मिशन इलाहाबाद जैसे लोकार्पण के बाद आर. के. कालेज मधुबनी को ऐसा सौभाग्य प्रदान करना इस संस्थान के लिये गौरव की बात है। प्रो. श्रुतिधारी सिंह ने लोकार्पण करते हुये कहा कि बिपिन कुमार झा को इस पत्रिका हेतु किसी भी प्रकार की आवश्यकता होने पर मेरे द्वारा सहयोग प्रदान किया जाएगा। सभागार मे उपस्थित प्रो. रामेश्वर झा, प्रो. अभयधारी सिंह, डा. अरविन्द कुमार सिंह झा, प्रो. अमिताभ, प्रो. नरेश मोहन झा, प्रो. प्रमोद रंजन झा, प्रो. मुनीश्वर यादव प्रभृति द्वारा ई जर्नल जाह्नवी को दीर्घजीवी होने की शुभकामना दी गयी। उक्त अवसर पर श्री लम्बोदर झा, श्री अजयधारी सिंह, श्री अमरनाथ, श्री आनन्द, श्री पंकज कुमार झा, श्री केशवधारी सिंह आदि उपस्थित थे। सारस्वत निकेतनम् परिवार की ओर से पत्रिका के सम्पादक एवं प्रकाशक बिपिन कुमार झा ने समस्त संस्कृत प्रेमियों, जाह्नवी टीम साथ ही अधोलिखित मीडिया को ’जाह्नवी’ पत्रिका के सप्तम अंक के लोकार्पण एवं जनसामान्य तक पहुँचाने के लिये साधुवाद दिया है।–१. दैनिक जागरण (१६ जुलाई, मिथिलांचल), २. प्रभात खबर (१६ जुलाई, मिथिलांचल), ३. दूरदर्शन DD1. (१६ जुलाई, नई दिल्ली), ४. आकाशवाणी पटना (१५ जुलाई, प्रादेशिक समाचार), ५. आज (१७ जुलाई, मिथिलांचल), ६. नादर्न इण्डिया पत्रिका (१७ जुलाई, इलाहाबाद), ७. अमर उजाला काम्पेक्ट (१७ जुलाई, इलाहाबाद), ८. हिन्दुस्तान (१७ जुलाई, इलाहाबाद), ९. हिन्दुस्तान टाइम्स (१७ जुलाई, इलाहाबाद), १०.युनाइटेड भारत (१७ जुलाई, इलाहाबाद), ११. दैनिक जागरण (१७ जुलाई, इलाहाबाद), १२.मिथिला रेडियो (स्वायत्तशासी साइट, १७ जुलाई दरभंगा)






  • ISSUE 08.
  • Inaugurated by-Prof. Shankarjee Jha, HOD, Sanskri Dept.
  • Representative- Dr. Suman Dixit.
  • Report- पञ्जाब विश्वविद्यालय के संस्कृतविभागाध्यक्ष प्रो. शंकरजी झा द्वारा संस्कृत विभाग में पत्रिका का लोकार्पण किया गया। प्रतिनिधि के रूप में केन्द्रीयविद्यालय में कार्यरत एवं पत्रिका के अभिन्न अंग के रूप में विद्यमान डा. सुमन दीक्षित विद्यमान रहीं।






  • ISSUE 09.
  • Issue-9th || Vol-III || Date-02.02.2012 || Year- 3 || Place- Kolkata || WB, India.
  • Inaugurated by- Prof. Radhavallabh Tripathi, VC, RSKS, New Delhi.
  • Representative-
  • Report- कोलकातायां नरेन्द्रपुरस्थस्य रामकृष्ण-मिशन-आवासीय-स्वयंशासित-महाविद्यालयस्य संस्कृतविभागेन फरबरीमासस्य 2-3 दिनाङ्कयोः संस्कृते अनूदितं रवीन्द्रसाहित्यम् इति विषयमधिकृत्य दिनद्वयात्मिका राष्ट्रिया सङ्गोष्ठी आयोजिता। तदङ्गतया प्रो.सीतानाथ आचार्यस्य आध्यक्षे, प्रो.राधावल्लभत्रिपाठिनां, प्रो.रमाकान्तशुक्लानाम् आतिथ्ये, श्रीराकेशदाशस्य संयोजनायां प्रचलिते कविसमवाये पञ्चदश कवयः स्वकाव्यानि पठितवन्तः। अस्मिन् सत्रे जाह्नवी-ई-जर्नलइत्यस्याः आन्तर्जालपत्रिकायाः लोकार्पणं विहितं राष्ट्रियसंस्कृतसंस्थानस्य कुलपतिभिः आचार्यैः राधावल्लभत्रिपाठिभिः। पत्रिकां समुपस्थापितवान् डॉ.मुकेशकुमारझा-महोदयः। पत्रिकाविषये विवरणं दत्तवान् – कथासरितः सहसम्पादकः श्रीराकेशकुमारदाशः। कार्यक्रमं संयोजितवान् नारायणदाशः। जाह्नव्याः मुख्यसम्पादकाः भारतसर्वकारस्याधीनपूर्वशिक्षाविद्सदस्याः विद्यावाचस्पतिसदानन्दझामहोदयाः सन्ति। एतस्याः पत्रिकायाः सम्पादकाः प्रो. पीयूषकान्तदीक्षित-प्रो.रविशङ्करमेनन-श्रीबिपिनकुमारझा सन्ति। प्रकाशनान्तर्जालनिर्माणादिकर्ता राष्ट्रियसंस्कृतसंस्थानस्य श्रीसदाशिवपरिसरस्य साहित्यविभागाध्यापकः श्रीबिपिनकुमारझा अस्ति। कार्यक्रमे उपस्थिताः आसन् – प्रो.सीतानाथ आचार्यः, प्रो.नवनारायणवन्द्योपाध्यायः, डॉ.बनमालिबिश्वालः, डॉ.तन्मयकुमारभट्टाचार्यः, डॉ.सूर्यमणिरथः, अजयकुमारमिश्रः, धर्मेन्द्रकुमारसिंहदेवः, अशोककुमारव्यासः, राकेशदाशः, विश्वनाथस्वाईँ, विवेकानन्दपाणिग्राही, चन्द्रशेखरदासवर्मा, सौमित्र अधिकारी, खोखनभट्टाचार्यः, सम्पापाल, इत्यादयः शतं प्रायाः विद्वांसः। नरेन्द्रपुरस्थ-रामकृष्णमिशनस्य अध्यापकानाम्, श्रीसीतारामवैदिकादर्शसंस्कृतमहाविद्यालयस्य अध्यापकानात्र विशेषः सहयोग आसीत् इति ते धन्यवादार्हाः सन्ति एव।






  • ISSUE 10.
  • Issue-10th || Vol-III || Date-12.05.12 || Year- 3 || Place- JRRSU || Jaipur,Rajasthan, India.
  • Inaugurated by-Prof. Ramanuj Devanathan, VC- JRRSU, Rajasthan
  • Representative-Dr. Yogesh Sharma.
  • Report- NA






  • ISSUE 11-12.
  • Issue-11th & 12th || Vol-III || Date-10.11.2012 || Year- 3 || Place- Lucknow || UP, India.
  • Inaugurated by-Prof. Omprakash Pandey
  • Representative- Dr. Sandeep Kumar Singh and Dr. Sarita Shriwastav.
  • Report- लखनऊ 10 नवम्बर 2012, को बोरा इन्स्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेन्ट साइंसेज, परिसर में श्ूूूण्रंीदअपेंदेातपजमरवनतदंसण्बवउश् पत्रिका का लोकार्पण लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष ज्ञान शिरोमणि प्रोफेसर ओमप्रकाश पाण्डेय जी के कर कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ जाह्नवी संस्कृत ई जर्नल एक ऐसी साइट निर्मित की गयी है जो संस्कृत भाषानुरागी ही नहीं वरन् हिन्दी व अंग्रेजी भाषा में भी विचारों की अभिव्यक्ति की अपेक्षा व सम्पर्क की स्वतन्त्रता का स्वागत करती है। यह शोधपत्रों के साथ-साथ विचारा भिव्यक्ति एवं संस्कृति संरक्षण हेतु मान्य हैं। वर्तमान युग संगडक क्रान्ति का युग है इसके माध्यम से सभी विद्वानों का संगम विचारों का आदान प्रदान अब कठिन नहीं है अतः संस्कृत व संस्कृति का संरक्षण हमारा परम कर्तव्य है। यह बातें कानपुर से आयी डाॅ0 सुमन दीक्षित ने कही। इस साइट का निर्माण, डिजाइन, प्रारूप पूर्ण रूपेण विपिन झा द्वारा किया गया जो राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान हिमांचल प्रदेश में असिस्टेन्ट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। डा0 सरिता श्रीवास्तव तथा अन्य विद्वानों के सहयोग से कार्यक्रम को सामलतम ढंग से सम्पन्न किया गया। वैदिक मण्डलाचरण केशवः ओगेशः के द्वारा सम्पन्न किया गया सौकिक मण्डलाचरण माधुरी व दिव्या द्वारा प्रस्तुत किया गया। अनुराधा व भूमिका स्वागत गीतम् तथा डा0 सुमन दीक्षित महोदया द्वारा पत्रिका के विषय मंे पूर्ण जानकारी दी गयी तथा डा0 संदीप सिंह द्वारा मंच संचालन किया गया। संस्थान के प्राचार्य डा0 डी0आर0सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ छात्रों को पूर्णतः संस्कृत व संस्कृति के संरक्षण का दायित्व संवहन करने का प्रोत्साहन जिम्मेदारी दी गयी। सभा में मुख्य रूप से डा0 किरन सिंह, डा0 स्मिता श्रीवास्तव, डा0 जया सिंह, पंकज वर्मा शैल पाण्डेय प्राध्यापक उपस्थित रहे।






  • ISSUE 13-14.
  • Issue-13th & 14th || Vol-IV || Date-04.05.2013 || Year- 4 || Place- Bengaluru || Karnataka, India.
  • Inaugurated by-पुत्तिगे मठ, उडुपि, कर्णाटक के मठाधीश परमपूज्य श्री श्री सुगुणेन्द्रतीर्थस्वामी
  • Representative-Vidwan Suman K. S.
  • Report-
    देवभूमि में देवभाषा के प्रचार-प्रसार हेतु समर्पित सारस्वत-निकेतनम् के द्वारा प्रचालित संस्कृत के प्रथम ई जर्नल के चौदहवें अंक का लोकार्पण पुत्तिगे मठ, उडुपि, कर्णाटक के मठाधीश परमपूज्य श्री श्री सुगुणेन्द्रतीर्थस्वामी के द्वारा दिनाङ्कः - ४-५-२०१३ को सायं ६ बजे श्री गोवर्धनगिरि सभाङ्गण, बेङ्गळूरु. मे विधिवत् वैदिक मन्त्रोच्चारण के साथ संगणक यन्त्र द्वारा ’क्लिक’ कर किया गया। इस अन्तर्राष्ट्रिय शोधपत्रिका के मुख्यसम्पादक भारतसरकार के पूर्वशिक्षाविद् सदस्य डा. सदानन्द झा एवं प्रकाशक बलाहर स्थित संस्कृत विद्यापीठ में अध्यापनरत श्री बिपिन कुमार झा है। लोकार्पण के अवसर पर प्रधानसम्पादक एवं प्रकाशक की अपरोक्ष उपस्थिति के साथ विद्यावाचस्पति प्रभञ्जनाचार्य, डा. रविसुब्रमण्यम् (MLA) प्रभृति सैकडो संस्कृतानुरागियों की उपस्थिति रही। इस शोधपत्रिका का मुख्य उद्देश्य ’पारम्परिकसंस्कृत का अर्वाचीन तकनीकि के साथ मञ्जुल प्रयोग के द्वारा शोधछात्रों के लिये अभिनूतन आयाम उपस्थित करना’ है। पत्रिका के चौदहवें अंक को अध्येताओं तक पहुंचाने में परिसर के अध्यापकों, भारत एव विदेशों में विद्यमान प्रतिनिधियों विशेषरूप से डा. राधाबल्लभ शर्मा, डा. सुमन. के. एस् , डा. सुनील के. एस्, श्री नारायणदत्त मिश्र का विशेष योगदान रहा है। पत्रिका को jahnavisanskritejournal.com पर पढा जा सकता है। इससे पूर्व यह पत्रिका प्रो. हरेकृष्ण शतपथी (VC, RSVV, Tirupati), प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी (VC RSkS), प्रो. रामानुज देवनाथन (VC, JRRSU) प्रभृति मूर्धन्य विद्वानों के द्वारा लोकार्पित की गयी है।





  • ISSUE 15-16.
  • Issue-15th & 16th || Vol-IV || Date-05.10.2013 || Year- 4 || Place- Bhagalpur || Bihar, India.
  • Inaugurated by-Shri Indu Shekhar Jha, Rtd. SP, Bhagalpur
  • Representative-Dr. Mukesh Kumar Mishra
  • Report-NA






  • ISSUE 17.
  • Issue-17th || Vol-V || Date-14.01.2014 || Year- 5 || Place- Tripinithura || Kerala, India.
  • Inaugurated by-Smt. K P Prasanna, Principal, GSC, Tripinithura, Kerala
  • Representative-Vidwan Suman K. S.
  • Report-NA






  • ISSUE 18.
  • Issue-18th || Vol-V || Date-25.05.2014 || Year- 5 || Place- Rajsthan University, Jaipur || Rajsthan, India.
  • Inaugurated by-Prof Rajendr Mishra, Ex. VC, SSVV, Varanasi, India.
  • Representative- Dr. Lalit Sharma.
  • Report- जाह्नव्या अष्टादशाङ्कस्य लोकार्पणं कविपुङ्गवानाम् आचार्याभिराजराजेन्द्रमिश्रवर्याणां करकमलाभ्यां मईमासस्य 25 तमे दिनाङ्के पाटलनगर्यां जयपुरे सम्पन्नतां गतः। तत्र पत्रिकाया अस्याः प्रातिनिध्यमवहत् डा ललितकिशोरशर्ममहाभागः।






  • ISSUE 19-20.
  • Issue-19th & 20th || Vol-V || Date-06.12.2014 || Year- 5 || Place-Ramkrishn Mission, Shimala, H. P , India.
  • Inaugurated by-स्वामीनीलकण्ठानन्दजीमहारजद्वारा, अध्यक्षाः, रामकृष्णमठ,शिमला, हिमाचलप्रदेशः
  • Representative- Shri Rakesh Sharma.
  • Report-NA.






  • ISSUE 21-22.
  • Issue-21st & 22nd || Vol-VI || Date-27.07.215 || Year- 6 || Place- Kangra || HP, India.
  • Inaugurated by-Prof. Ramakant Pandey, Director, DE, RSKS, New Delhi.
  • Representative- Dr. Sarita Shrivastav.
  • Report-NA






  • ISSUE 23-24.
  • Issue-23th & 24th || Vol-VII || Date-05.02.2016 || Year- 7 || Place- Kanchipuram || Tamilnadu, India.
  • Inaugurated by-
  • Representative-
  • Report- सारस्वतनिकेतनान्तर्गतप्रकाश्यमानायाः जाह्न्व्याः चतुर्विंशतितमं पुष्पं लोकाय अद्य 05-02-2016 तमे दिवसे काञ्चीपुरस्थे श्रीचन्द्रशेखरेन्द्रसरस्वतीविश्वमहाविद्यालये प्रो.डा. रामकृष्ण पिशिपाटि महोदयानां करकमलाभ्यां अर्पितम् । अस्यमुख्यसम्पादकाः विद्यावाचस्पति सदानन्दझाः सन्ति। कार्यक्रमे तत्रादौ श्रीचन्द्रशेखरेन्द्रसरस्वतीविश्वमहाविद्यालयस्य अध्यापकाः डा. हीरालाल दाश महाभागाः सारस्वतनिकेतनं तथा च जाह्न्व्याः लोकलोचनविषये सर्वमपि रहस्यम् उपस्थापितवन्तः । तत्र कथं ते जाह्न्वया सह संयोजिताः तथा तत्सेवया नियुक्ता इति विषयमपि उक्तवन्तः । सम्पादकाः डा. दाश महाभागाः एतदर्थं डा.विपिन कुमार झा महाभागानां कृते धन्यवादमर्पितवन्तः । एतदर्थं जाह्नव्याः सहसम्पादकः मु.विनोद इति नामधेयः संस्कृतशोधच्छात्रः, श्रीचन्द्रशेखरेन्द्रसरस्वतीविश्वमहाविद्यालयस्थः, बहुधा सहायम् अकरोत्। अनन्तरं प्रो.डा.रामकृष्णपिशिपाटि महाभागाः सङ्कायप्रमुखाः जाह्न्व्याः लोकलोचनम् अन्तर्जाले एकादशवादने कृतवन्तः । तत्र लोकलोचनसमये केचन छात्राः उपस्थिता आसन् संस्कृत के लिये समर्पित जाह्नवी संस्कृत ई शोधपत्रिका के तेइसवें अंक का लोकार्पण आजकाञ्चीपुरम् के श्रीचन्द्रशेखरेन्द्रसरस्वतीविश्वमहाविद्यालय के संस्कृत डीन प्रो.डा. रामकृष्ण पिशिपाटि महोदय के द्वारा किया गया। पत्रिका के सम्पादक एवं प्रकाशक राष्ट्रिय संस्कृतसंस्थान बलाहर( प्रागपुर) के अध्यापक श्री बिपिन कुमार झा ने इस अवसर पर संस्कृत समाज एवं मीडिया को धन्यावादार्ह माना है। ज्ञातव्य है कि यह पत्रिका ज्ञानविज्ञान एवं संस्कृत जगत में होने बाली नवीन सर्जनाओं को प्रमुखता देती है। इससे पूर्व इसका विमोचन शिमला एवं बलाहर में हो चुके हैं।






  • ISSUE 25-26.
  • Issue-25th & 26th || Vol-VII || Date-22.08.2016 || Year- 7 || Place- Kurukshetra || Hariyana, India.
  • Inaugurated by-Prof. Lalit Kumar Gaur, Director, Prachyavidya sansthan.
  • Representative-Shri Sumit Kumar.
  • Report- सारस्वत्-निकेतनान्तर्गतप्रकाशितायाः जाह्नवी-पत्रिकायाः पञ्चविंश-षड्विंशाङ्कयोः लोकार्पणं हरियाणास्थकुरुक्षेत्रविश्वविद्यालयस्य संस्कृत-प्राच्यविद्यासंस्थानस्य निदेशकेन, संस्कृत-पालि-प्राकृतविभागाध्यक्षेण आचार्यललितकुमारगौडमहाशयेन संस्कृतसप्ताहे 21 तमे दिनाङ्के रविवासरे कुरुक्षेत्रे अभवत्। तत्र अस्माकं प्रतिनिधिरूपे श्रीसुमितकुमारः कार्यसम्पादनं कृतवान्।






  • ISSUE 27-28.
  • Issue-27th -28th || Vol-VII || Date-21.12.2016 || Year- 7 || Place- Jaipur || Rajsthan, India.
  • Inaugurated by-श्रीप्रतापसिंहजी (Ex. Minister UDH, Govt. Rajasthan.
  • Representative-शास्त्री कोशलेन्द्र दास
  • Report- जाह्नवी संस्कृत ई जर्नल के 28वें अङ्क का लोकार्पण शास्त्री कोशलेन्द्र दासजी के प्रतिनिधित्व में श्रीप्रतापसिंहजी (Ex. Minister UDH, Govt. Rajasthan) के (31.12.2016 ) द्वारा सिविल लाइंस जयपुर में किया गयाजाह्नवी संस्कृत ई जर्नल के 28वें अङ्क का लोकार्पण शास्त्री कोशलेन्द्र दासजी के प्रतिनिधित्व में श्रीप्रतापसिंहजी (Ex. Minister UDH, Govt. Rajasthan) के (31.12.2016 ) द्वारा सिविल लाइंस जयपुर में किया गया






  • ISSUE 29.
  • Issue-29th || Vol- || Date- || Year- || Place- || .
  • Inaugurated by-
  • Representative-
  • Report-




  • ISSUE 30-31.
  • Issue-
  • Vol-
  • Date-
  • Year-
  • Place-
  • Inaugurated by-
  • Representative-
  • Report-



  • ISSUE 32.
  • Issue-32
  • Vol-1
  • Date-22.01.2018
  • Year- 8
  • Place- Madhubani
  • Inaugurated by- Dr. D N Jha ADM
  • Representative-Dr. Ram Sevak Jha
  • Report-
    संस्कृत में निबद्ध ज्ञान-विज्ञान को तकनीकि से जोड़ने में ई-जर्नल की महत्ती भूमिका-एडीएम @ जाह्नवी ई-जर्नल के अभिनव अङ्क का समाहरणालय में हुआ लोकार्पण सभी भाषाओं की जननी संस्कृत आदिकाल से रही है। वेद,उपनिषदों,पुराणों आदि में वर्णित संस्कृत भाषा में निबद्ध ज्ञान-विज्ञान के बातों को आज आधुनिक तकनीकि से जोड़ने की आवश्यकता है । जिससे संस्कृत भाषा को नहीं भी जानने वाले व्यक्ति अन्तर्जाल के माध्यम से अनुवाद कर आसनी से समझ सकता है । ये बाते समाहरणालय में जाह्नवी संस्कृत-ई-जर्नल के अभिनव अङ्क का लोकार्पण करते हुए अपर समाहर्ता दुर्गानन्द झा ने कही । उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अंताराष्ट्रीय मानक प्राप्त संस्कृत के प्रथम ई-जर्नल जाह्नवी पत्रिका शोध के क्षेत्र में महती भूमिका अदा करेगी । ई-जर्नल के माध्यम से न केवल देश अपितु विदेशों में भी संस्कृत क्षेत्र में हो रहे कार्यों से लोग लाभान्वित होंगे । संस्कृत भाषा में लिखे गूढ़ त्तत्वों को सरल बनाकर जनमानस में प्रचार प्रसार करने में ई-जर्नल अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होगा । समारोह को सम्बोधित करते हुए वाटसन के प्राचार्य रामकृष्ण मिश्र ने कहा कि ई-जर्नल के 32वें अङ्क तक पहुंचना ही इसकी सफलता स्पष्ट प्रतीत होता है । वैदिक मन्त्रों के जयघोष के द्वारा अपर समाहर्ता दुर्गानन्द झा ने जाह्नवी के 32वें अङ्क का लैपटॉप पर मॉस क्लिक कर लोकार्पण किया । ई-जर्नल के सम्पादक सह लोकार्पण संयोजक डॉ.रामसेवक झा ने बताया कि 20 जनवरी 2010 को तिरुपति विद्यापीठ के कुलपति हरेकृष्ण शतपथी के द्वारा प्रथम अङ्क का लोकार्पण किया गया । उसके बाद यह त्रैमासिक पत्रिका देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों,प्रशासनिक संस्थाओं के अलावे विदेश में अटलाण्टा में भी पिछले अङ्कों का विमोचन किया जा चुका है । संस्कृत के प्रथम ई-जर्नल को यूजीसी के अलावे इम्पेक्ट फेक्टर की भी मान्यता मिल चुकी है । प्रत्येक तीन मास में संस्कृत-हिन्दी-अंग्रेजी भाषों में शोधपत्र देश के विभिन्न कोणे से प्राप्त होते हैं । जिसे मास के अन्त में निर्धारित स्थान पर लोकार्पण किया जाता है । 32 वें अंक में कुल 21 शोधपत्र प्रकाशित किये गये है । ई-जर्नल के प्रधान सम्पादक लगमा के व्याकरण विभागाध्यक्ष विद्यावाचस्पति डॉ.सदानन्द झा ने बताया कि शोधार्थियों छात्रों को शोध में नूतन आयाम प्रदान करने में यह पत्रिका श्रेयस्कर है । प्रकाशक डॉ.बिपिन कुमार झा के निरन्तर प्रयत्न से यह जर्नल नित्य नूतनता को प्राप्त कर रहा है । लोकार्पण समारोह में अपर समाहर्ता दुर्गानन्द झा,राजस्व अधिकारी सत्यप्रकाश , आपदा पदाधिकारी अरविन्द कुमार झा, वाटसन के शिक्षक सुधांशु शेखर झा,शिक्षाविद् डॉ.रामसेवक झा सहित कई गणमान्य लोग सम्मलित थे ।




  • List of Authors.






    List of Published Papers.







    List of Inaugrator.






    List of Representatives.





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  • Shri Sumit Saxena
    Rashtriya Sanskrit Sansthan Bhopal Campus,
    Subscription ID-  S-NIKETANAM/JSEJ/2526/VII/SUB-2016/01

  • Dr. Shyam Sundar Pandey, Librarian I/c., Assistant Librarian

    Rastriya Sanskrit Sansthan, Under MHRD, Govt. of India (Deemed University() Jaipur. Rajasthan-302018, website: www.rsksjaipur.ac.in
    Subscription ID-  S-NIKETANAM/JSEJ/2526/VII/SUB-2016/02

  • Anjan K
    Subscription ID-  S-NIKETANAM/JSEJ/2526/VII/SUB-2016/03

  • Dr.G S S Murthy
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  • Mansukh Moliya
    Subscription ID-  S-NIKETANAM/JSEJ/2526/VII/SUB-2016/08

  • Shri Vasantkumar Bhatt
    ) Subscription ID-  S-NIKETANAM/JSEJ/2526/VII/SUB-2016/05

  • Arun Nishad
    लखनऊ विवि.में प्रो.रामसुमेर यादव संस्कृत विभागाध्यक्ष के निर्देशन में शोधरत
    Subscription ID-  S-NIKETANAM/JSEJ/2526/VII/SUB-2016/06

  • Mrs. Malti AUCKLE
    Head Department of Sanskrit, Senior Lecturer in Sanskrit, School of Indological Studies, Mahatma Gandhi Institute, Moka, Mauritius.
    Subscription ID-  S-NIKETANAM/JSEJ/2526/VII/SUB-2016/07

  • Uday Shankar Khatua
    Subscription ID-  S-NIKETANAM/JSEJ/2526/VII/SUB-2016/09



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